ज्यादातर लोग हेल्थ पॉलिसी (Health Insurance) इस उम्मीद के साथ खरीदते हैं कि उन्हें कभी इसके इस्तेमाल की जरूरत नहीं पड़ेगी, साथ ही उन्हें यह भरोसा भी होता है कि किसी आकस्मिक स्थिति में पॉलिसी उनकी मदद करेगी. हालांकि, उन्हें सच्चाई का अंदाज़ा तब होता है, जब वे पॉलिसी का उपयोग करते हैं.
कई मामलों में ऐसा होता है कि पॉलिसीहोल्डर्स के दावे खारिज़ हो जाते हैं, जबकि वे नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान कर रहे होते हैं. इस तरह का रिजेक्शन पॉलिसीहोल्डर्स के लिए अकल्पनीय झटके से कम नहीं होता, खासकर अगर वे आर्थिक मदद के लिए इस कवर पर बहुत अधिक निर्भर होते हैं.
अगर आपको भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़े तो अपनी उचित दावा राशि को आप कैसे पा सकते हैं, यह आपको जरूर जानना चाहिए.
हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) क्लेम खारिज़ होने के बाद क्या करें?
अगर ऐसी स्थिति को सामना हो तो सबसे पहले, अस्वीकृति के कारण और पॉलिसी में बताए गए कार्रवाई के तरीके का अध्ययन करें. सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय सेन ने बताया, “रिजेक्शन की स्थिति में पॉलिसी में खुद ही दावा दायर करने और इसे आगे बढ़ाने का प्रोटोकॉल दिया जाता है. ज्यादातर बीमा कंपनियों ने ऐसी स्थितियों के लिए प्रक्रियाओं का निर्धारण किया है.”
आप संबंधित हेल्थ इंस्योरेंश कंपनी के शिकायत निवारण अधिकारियों (जीआरओ) से संपर्क कर सकते हैं. पॉलिसीहोल्डर्स रिजेक्शन की स्थिति में संबंधित लोकपाल से संपर्क कर सकते हैं, हालांकि पहले उन्हें बीमा कंपनी से संपर्क करना चाहिए.
पायनियर लीगल के पार्टनर शौभिक दासगुप्ता ने बताया, अगर किसी बीमाकर्ता ने बीमा दावा खारिज कर दिया है या अगर दी गई दावा राशि पॉलिसी के तहत कवर किए जाने वाले खर्च से कम है तो पीड़ित पॉलिसीहोल्डर को लोकपाल के पास जाने से पहले संबंधित बीमाकर्ता के पास शिकायत दर्ज करनी होती है. इसके बाद, शिकायतकर्ता लोकपाल या उपभोक्ता अदालत से संपर्क कर सकता है, लेकिन दोनों एक साथ नहीं करना चाहिए.
क्या दावा खारिज़ होने के बाद हेल्थ इंस्योरेंश (Health Insurance) कंपनी के पास दोबारा अपील दायर करना जरूरी है? करंजावाला एंड कंपनी की पार्टनर मनमीत कौर का सुझाव है कि दावा खारिज़ होने के बाद हेल्थ इंस्योरेंश कंपनी के पास दोबारा अपील दायर करना जरूरी नहीं है. उन्होंने बताया, ”
हालांकि, ऐसे मामलों में जहां बीमा कंपनियों ने ऐसी अस्वीकृति/इनकार के कारणों के बारे में सूचित करते हुए दावे को अस्वीकार कर दिया है, पॉलिसीधारक ऐसी कमियों को सुधारने के बाद दावे को फिर से दाखिल कर सकता है.” लेकिन जब पॉलिसीधारकों के पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचता है, तो वे उचित फोरम से संपर्क कर सकते हैं.
IRDAI से संपर्क करें
आप टोल फ्री नंबर 155255 या 1800 4254 732 पर कॉल करके या complaints@irdai.gov.in पर एक ई-मेल भेजकर IRDAI के उपभोक्ता मामले विभाग शिकायत निवारण कक्ष से संपर्क कर सकते हैं.
इसके अलावा आप IRDAI द्वारा प्रबंधित ऑनलाइन पोर्टल, जिसे एकीकृत शिकायत प्रबंधन प्रणाली (IGMS) कहा जाता है, का भी उपयोग कर सकते हैं. यह आपकी शिकायत को आगे बढ़ाने का एक तरीका है, इसलिए इसका उपयोग बीमा कंपनी की ओर से उपलब्ध कराए गए चैनल के उपयोग करने के बाद ही किया जाना चाहिए.
यदि आप किसी भी कारण से सीधे बीमा कंपनी तक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं तो आप IGMS का इस्तेमाल कर सकते हैं, यह बीमा कंपनियों के साथ शिकायत दर्ज करने के लिए एक प्रवेश द्वार उपलब्ध कराता है.